मसालेदार राज़मा और जीरा राइस की रेसिपी
Description
सच कहूँ तो राजमा बनाना मैंने कई बार बिगाड़ा है। कभी दाने अंदर से कच्चे रह गए, कभी ग्रेवी इतनी पतली कि चावल पर टिकी ही नहीं। फिर धीरे-धीरे समझ आया कि राजमा कोई मुश्किल चीज़ नहीं है, बस उसे थोड़ा वक़्त और सही क्रम चाहिए। इस पोस्ट में मैं वही तरीका लिख रहा हूँ जो अब मेरे यहाँ हर बार काम करता है। हर चरण के साथ फोटो है, ताकि आप अपनी कढ़ाई में देखकर मिलान कर सकें कि आप सही रास्ते पर हैं या नहीं।
अगर आप पहली बार बना रहे हैं, तो घबराइए मत। बस पूरी पोस्ट एक बार पढ़ लीजिए, फिर गैस जलाइए।
सामग्री की सूची
जीरा राइस के लिए
बनाने की विधि
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रात को ही राजमा भिगो दीजिए
राजमा को धोकर भरपूर पानी में रात भर भीगने दें।
मेरी सबसे बड़ी गलती यही रही है कि मैंने सुबह उठकर "जल्दी वाला तरीका" आज़माया। नतीजा यह कि दाने बाहर से नरम और अंदर से सख्त निकले। रात भर भीगने पर राजमा फूलकर चमकदार हो जाता है, जैसा फोटो में दिख रहा है। सुबह उसका पुराना पानी ज़रूर फेंक दें।
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राजमा के साथ आलू भी उबालिए
भीगे राजमा और आधे कटे आलू को ताज़े पानी के साथ कुकर में उबाल लें।
आलू वाली यह तरकीब मुझे बहुत बाद में पता चली। उबलते हुए आलू से हल्का स्टार्च निकलता है और ग्रेवी बिना मलाई या काजू के भी गाढ़ी हो जाती है। पाँच-छह सीटी में राजमा आम तौर पर गल जाता है। एक दाना उँगलियों से दबाकर देख लें, वह आसानी से पिस जाना चाहिए।
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तेल में जीरे का तड़का
कढ़ाई में तेल गरम करें और जीरा डालें।
जीरा जैसे ही चटकने लगे और उसके चारों ओर छोटे बुलबुले दिखें, समझ लीजिए तेल तैयार है। यहाँ जल्दबाज़ी न करें। अगर जीरा काला पड़ गया, तो पूरी ग्रेवी में हल्की कड़वाहट आ सकती है।
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बारीक कटा प्याज़
बारीक कटे प्याज़ को तेल में डालकर चलाते रहें।
प्याज़ को जितना बारीक काटेंगे, ग्रेवी उतनी ही चिकनी बनेगी। शुरू में वह सफ़ेद और पारदर्शी दिखेगा। बीच-बीच में चलाते रहिए, क्योंकि प्याज़ तले में जल्दी चिपक जाता है।
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लहसुन-अदरक-मिर्च का दरदरा पेस्ट
लहसुन, अदरक और हरी मिर्च को कूटकर पेस्ट बना लें।
मिक्सर में भी चल जाएगा, पर खल-बट्टे में कुटे पेस्ट की खुशबू अलग ही होती है। फोटो में आप दरदरा पेस्ट देख सकते हैं, जिसमें मिर्च के बीज भी हैं। बच्चों या कम तीखा खाने वालों के लिए बीज निकाल दीजिए।
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प्याज़ भूरा होते ही पेस्ट डालें
प्याज़ हल्का सुनहरा होते ही तैयार पेस्ट उस पर डालकर भूनें।
यह वह मोड़ है जहाँ ज़्यादातर लोग चूक जाते हैं। पेस्ट बहुत जल्दी डाला तो प्याज़ कच्चा रहेगा, बहुत देर से डाला तो प्याज़ जल जाएगा। एक-दो मिनट भूनिए, जब तक रसोई में लहसुन-अदरक की खुशबू फैलने न लगे।
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टमाटर का पेस्ट
पके हुए प्याज़ में टमाटर का पेस्ट डालें।
टमाटर डालते ही कढ़ाई में रंग बदल जाता है और ग्रेवी की असली तस्वीर बनने लगती है। इसे चलाते हुए पकने दीजिए, ताकि इसकी खटास कम हो जाए और पेस्ट गाढ़ा दिखने लगे।
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कुटा हुआ धनिया पाउडर
दरदरा कुटा धनिया पाउडर टमाटर के मसाले में डालें।
धनिया ग्रेवी को सोंधापन देता है और तीखेपन को संतुलित करता है। गीले मसाले में डालने से यह जलता नहीं है, इसलिए डालते ही चला दें।
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बिना भुना जीरा पाउडर
बिना भुने जीरे का पाउडर भी उसी मसाले में मिला दें।
कच्चे जीरा पाउडर से ग्रेवी में ताज़ा और तेज़ खुशबू आती है। फोटो में दोनों पाउडर टमाटर के ऊपर रखे दिख रहे हैं। इन्हें अच्छी तरह घोल लीजिए।
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हल्दी पाउडर
आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मसाले में डालें।
हल्दी का रंग लाल मसाले में फैलता देखना मुझे हमेशा अच्छा लगता है। बस ध्यान रहे कि ज़्यादा न पड़े, वरना स्वाद में हल्की कड़वाहट आ जाती है।
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मसाला तेल छोड़ने तक पकाएँ
मसाले को चलाते हुए तब तक पकाएँ जब तक वह गाढ़ा न हो जाए और किनारों पर तेल न दिखने लगे।
यही इस पूरी रेसिपी का सबसे ज़रूरी संकेत है। जब मसाला तेल छोड़ दे, तो मान लीजिए कि कच्चापन चला गया। फोटो में मसाला गहरा और पेस्ट जैसा दिख रहा है, यानी अब आगे बढ़ा जा सकता है। अगर कढ़ाई में चिपकने लगे तो एक चम्मच पानी छिड़कें और तले को खुरच दें।
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उबला राजमा मसाले में डालें
उबले हुए राजमा को पके मसाले में डाल दें।
अब राजमा मसाले की खुशबू सोखना शुरू करता है। फोटो में देखिए, गाढ़ा नारंगी मसाला गहरे रंग के दानों पर चढ़ने लगा है। कलछी धीरे चलाइए, ताकि दाने साबुत रहें।
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आलू डालकर थोड़ा भूनें
उबले आलू के टुकड़े डालें और राजमा के साथ मसाले में दो-तीन मिनट भूनें।
इस छोटी सी भुनाई से हर दाने पर मसाला चढ़ जाता है। कलछी के पिछले हिस्से से एक-दो टुकड़े हल्के से दबा दें, ग्रेवी अपने आप गाढ़ी होने लगेगी। बड़े आलू के टुकड़े तैयार थाली में भी बहुत अच्छे लगते हैं।
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पानी और नमक डालकर धीमी आँच पर पकाएँ
ज़रूरत के हिसाब से पानी और नमक डालें, फिर 15 से 20 मिनट धीमी आँच पर पकने दें।
ग्रेवी फोटो जैसी चमकदार और गहरी भूरी दिखनी चाहिए। पतली पसंद हो तो गरम पानी मिला लें। धीमी आँच पर पकने से स्वाद सचमुच निखर आता है, इसलिए इसमें जल्दी मत कीजिए। आख़िर में नमक चखकर देख लें।
अब जीरा राइस की बारी
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चावल धोकर भिगोएँ
चावल को साफ़ पानी आने तक धोएँ और आधे घंटे भिगोकर रखें।
अगर आपके चावल अक्सर चिपक जाते हैं, तो इसकी वजह ज़्यादातर यही होती है कि उन्हें ठीक से धोया नहीं गया। धोने से ऊपरी स्टार्च निकल जाता है और भिगोने से दाने लंबे और अलग-अलग पकते हैं। पकाने से पहले पानी निथार लें।
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जीरे का तड़का
कुकर में एक चम्मच तेल गरम करें और उसमें जीरा डालें।
चावल के लिए बस एक चम्मच तेल काफ़ी है। जीरा हल्का सुनहरा होकर चटक जाए, तो समझिए तड़का तैयार है। यही खुशबू सादे चावल को जीरा राइस बना देती है।
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भीगे चावल कुकर में डालें
भीगे चावल कुकर में डालकर एक मिनट हल्के हाथ से चलाएँ।
तड़के वाले तेल में थोड़ा भूनने से दाने चमकदार हो जाते हैं और पकने के बाद एक-दूसरे से चिपकते नहीं। ज़ोर से न चलाएँ, वरना चावल टूट जाएँगे।
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पानी डालकर कुकर बंद करें
एक चम्मच नमक और बारीक कटी हरी धनिया पत्ती डालकर मिला दें।
धनिया की हरी पत्तियाँ सफ़ेद चावल में बहुत प्यारी लगती हैं और ताज़गी भी देती हैं। नमक अभी डालेंगे तो वह हर दाने में बराबर पहुँचेगा।
चावल से डेढ़ गुना पानी डालें और कुकर बंद करके दो सीटी आने दें।
पानी बस इतना हो कि चावल ढक जाएँ और धनिया ऊपर तैरती दिखे। दो सीटी के बाद गैस बंद कर दें और भाप खुद निकलने दें। कुकर जल्दी खोलने की गलती मैंने भी की है, चावल गीले हो गए थे।
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बस, आपकी राजमा चावल की थाली तैयार है। एक तरफ़ खिले-खिले जीरा राइस, दूसरी तरफ़ चमकती गाढ़ी राजमा ग्रेवी और उसमें नरम आलू के टुकड़े। साथ में कटा प्याज़, नींबू, पापड़ या दही रख लें, तो मज़ा दोगुना हो जाता है।
