साबुत मूंग दाल का डोसा और नारियल की चटनी की रेसिपी
Description
डोसा कहते ही आमतौर पर चावल-उड़द का घोल, उसे रात भर खमीर उठाने का इंतज़ार और ढेर सारी तैयारी याद आती है। लेकिन यह डोसा इन सब झंझटों से बिल्कुल अलग है। इसमें न चावल है, न उड़द की दाल, और न ही घोल को फर्मेंट करने की ज़रूरत। बस रात भर भीगी हुई साबुत हरी मूंग, थोड़ा सा चने का सत्तू, भीगा हुआ पोहा, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च को पीसिए और घोल तैयार।
साबुत मूंग इस डोसे की जान है। यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है और पेट को देर तक भरा रखती है। चने का सत्तू घोल को सौंधा स्वाद और अच्छी पकड़ देता है, जिससे डोसा तवे पर आसानी से फैलता है और पलटते या मोड़ते समय टूटता नहीं। पोहा घोल को हल्का और मुलायम बनाता है और डोसे के किनारों को कुरकुरा करने में मदद करता है। अदरक, लहसुन और हरी मिर्च पीसकर मिलाने से बैटर में ही मसाले का स्वाद आ जाता है।
भरावन के लिए उबले आलू में पत्ता गोभी, गाजर और शिमला मिर्च की रंग-बिरंगी सब्जियाँ राई-जीरे के तड़के में भूनी गई हैं। यहाँ एक देसी ट्विस्ट भी है: मसाले के लिए मैगी मैजिक मसाला डाला गया है, जो बच्चों और बड़ों, दोनों को खूब भाता है और भरावन को झटपट चटपटा बना देता है।
साथ में परोसी जाने वाली नारियल-दही की चटनी इस डोसे को पूरा करती है। भुनी हुई मूंगफली, चना दाल, सूखी लाल मिर्च और नारियल को दही के साथ पीसा गया है। भूनने से हर चीज़ में सौंधापन आता है, और दही चटनी को हल्की खटास और मलाईदार बनावट देता है।
यह डोसा नाश्ते, लंच बॉक्स, शाम के हल्के खाने या डाइट वाले भोजन, हर मौके के लिए बढ़िया है। बच्चों को सब्जियाँ खिलाने का यह एक मज़ेदार तरीका भी है।
सामग्री
बनाने की विधि
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साबुत हरी मूंग को 2-3 बार धोकर भरपूर पानी में रात भर या कम से कम 7-8 घंटे भिगो दें। सुबह तक मूंग फूल जाएगी और कुछ दानों में छोटे-छोटे अंकुर भी दिख सकते हैं। यह अच्छी निशानी है, इससे बैटर और पौष्टिक बनता है। पानी निथार लें।
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भीगी मूंग को मिक्सर जार में डालें और उसके साथ छिला हुआ लहसुन, अदरक का टुकड़ा और हरी मिर्च डालें। मसाले शुरू से ही पीसने के लिए डालने से पूरे बैटर में एकसार स्वाद आ जाता है।
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जार में 3-4 बड़े चम्मच भुने चने का सत्तू डालें। सत्तू बैटर को सौंधी खुशबू और बाँधने की ताकत देता है, जिससे डोसा तवे पर आसानी से फैलता है और मोड़ने पर टूटता नहीं।
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पोहा को पानी में 5 मिनट भिगोकर निचोड़ लें और जार में डाल दें। पोहा बैटर को हल्का और मुलायम बनाता है और डोसे के किनारे कुरकुरे करता है।
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अब साबुत मूंग, सत्तू, पोहा, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च को थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए बारीक पीस लें। बैटर न बहुत गाढ़ा हो, न बहुत पतला। करछी से उठाने पर धार की तरह गिरे, ऐसा होना चाहिए। नमक मिलाकर 10 मिनट ढककर रखें। इसे खमीर उठाने की ज़रूरत नहीं।
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डोसे के मसाले के लिए आलू को आधा-आधा या चार टुकड़ों में काटकर कुकर में पानी के साथ 3-4 सीटी तक उबाल लें। ठंडा होने पर छीलकर हल्के हाथ से मोटा तोड़ लें। पूरी तरह मैश न करें, ताकि बनावट बनी रहे।
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कढ़ाई में तेल गरम करें। राई और जीरा डालकर चटकने दें। मसालों के चटकने की आवाज़ और खुशबू आए तो अगला कदम लें।
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लंबे कटे प्याज़ और हरी मिर्च डालें और 2-3 मिनट मध्यम आँच पर भूनें, जब तक प्याज़ पारदर्शी और हल्का सुनहरा न होने लगे।
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अब बारीक कटी पत्ता गोभी, गाजर और शिमला मिर्च डालकर तेज़ आँच पर 3-4 मिनट चलाते हुए भूनें। सब्जियाँ बस हल्की नरम हों और हल्का कुरकुरापन बचा रहे, इससे भरावन में बनावट अच्छी आएगी।
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उबले और तोड़े हुए आलू कढ़ाई में डाल दें। हल्के हाथ से सब्जियों के साथ मिलाएँ।
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ऊपर से मैगी मैजिक मसाला और ज़रूरत हो तो थोड़ा नमक डालें। कलछी से अच्छी तरह मिलाएँ ताकि मसाला हर टुकड़े पर चढ़ जाए। 2-3 मिनट पकाकर गैस बंद कर दें। आलू का मसाला तैयार है।
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नॉन-स्टिक या लोहे का तवा गरम करें और हल्का तेल लगाकर पोंछ लें। एक करछी बैटर बीच में डालें और गोलाई में बाहर की ओर फैलाएँ। बहुत पतला न फैलाएँ, क्योंकि मूंग का डोसा चावल के डोसे से थोड़ा मोटा होता है। फोटो में दिख रहे गोल घेरे वाले पैटर्न की तरह फैलाना सही रहता है। किनारों पर थोड़ा तेल डालें।
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जब डोसे की सतह पर छोटे छेद उभरने लगें और ऊपर का भाग सूखने लगे, तब आधे हिस्से पर आलू-सब्जी का भरावन एक बराबर परत में फैला दें। ज़्यादा भरावन न रखें, वरना मोड़ते समय बाहर निकलेगा।
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कलछी की मदद से डोसे के खाली हिस्से को भरावन वाले हिस्से पर आराम से मोड़ दें, अर्धचंद्र आकार बन जाएगा। 1-2 मिनट और सेंकें, जब तक दोनों तरफ सुनहरा रंग और कुरकुरापन न आ जाए। बैटर में सत्तू होने के कारण डोसा आसानी से मुड़ जाता है।
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ताज़ा नारियल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। सूखा नारियल इस्तेमाल करें तो भी चलेगा, पर ताज़ा नारियल चटनी को मीठा और मलाईदार स्वाद देता है।
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एक सूखी कढ़ाई में मूंगफली और चना दाल डालें और धीमी आँच पर चलाते हुए भूनें। जब मूंगफली पर हल्के भूरे धब्बे आ जाएँ और दाल सुनहरी हो जाए, तब उतार लें। भूनने से इनमें सौंधापन आता है।
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उसी कढ़ाई में सूखी लाल मिर्च और नारियल के टुकड़े डालें और 1-2 मिनट हल्का भूनें। नारियल को सुनहरा नहीं, बस हल्का गरम करना है, वरना चटनी का रंग गहरा हो जाएगा।
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सारी भुनी सामग्री ठंडी होने पर मिक्सर जार में डालें, ऊपर से ताज़ा दही डालें और थोड़ा पानी मिलाकर दरदरा या चिकना पीस लें, जैसा आपको पसंद हो।
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गरमा-गरम डोसा प्लेट में निकालें और बगल में एक बड़ी चम्मच नारियल-दही की चटनी रखें। डोसे का एक टुकड़ा तोड़ें, उसमें भरावन और चटनी लगाकर खाएँ। अंदर से नरम, बाहर से कुरकुरा, यही इसकी खासियत है।
