चटपटी तवे वाले टमाटर की चटनी और पराठा की रेसिपी
Description
कुछ स्वाद ऐसे होते हैं जो बड़ी तैयारी के बिना भी दिल जीत लेते हैं। गरम पराठे के साथ तवे पर भुने टमाटर और लहसुन की चटनी ऐसी ही एक जोड़ी है। न कोई मिक्सर चाहिए, न सिलबट्टा। बस एक कढ़ाई, कुछ टमाटर, लहसुन की कलियाँ और सरसों के तेल का तड़का, और कुछ ही मिनटों में चटपटी चटनी तैयार।
इस चटनी की खासियत है टमाटरों को साबुत भूनने का तरीका। आधे कटे टमाटर सरसों के तेल में लहसुन के साथ धीमी आँच पर पकते हैं। टमाटर अपने ही पानी में गलते हैं, छिलका अलग हो जाता है, और लहसुन की कलियाँ तेल में सुनहरी होकर मिठास और खुशबू घोल देती हैं। फिर करछी से मसलकर इसमें कच्चा प्याज़, हरी मिर्च और हरा धनिया मिला दिया जाता है। आखिर में चुटकी भर चीनी खटास को संतुलित करती है और ऊपर से एक चम्मच कच्चा सरसों का तेल चटनी में वही तेज़, चटकदार स्वाद ले आता है जो गाँव की रसोई की पहचान है।
इस चटनी के साथ परोसे जाने वाले पराठे भी सादे नहीं हैं। गेहूँ के आटे में कलौंजी मिलाई गई है, जो पराठे को हल्की तीखी महक और काले दानों की सुंदर बुंदकियाँ देती है। आटे में थोड़ा तेल मिलाने से पराठे नरम रहते हैं। गोल रोटी बेलकर उस पर तेल लगाकर आधा मोड़ा जाता है, जिससे तवे पर सेंकने पर परतें खुल जाती हैं।
यह जोड़ी नाश्ते, हल्के लंच या रात के सादे खाने के लिए एकदम सही है। साथ में दही, अचार या एक कप गरम चाय हो, तो और क्या चाहिए।
टमाटर-लहसुन की चटनी के लिए सामग्री
बनाने की विधि
तवे वाली टमाटर की चटनी
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कढ़ाई में सरसों का तेल डालकर मध्यम आँच पर गरम करें। तेल से हल्का धुआँ उठने लगे तो आँच थोड़ी धीमी कर दें। इससे सरसों के तेल की कच्ची गंध निकल जाती है और चटनी का स्वाद मीठा और गहरा आता है।
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टमाटर को अच्छी तरह धोकर बीच से दो हिस्सों में काट लें। कटा हुआ हिस्सा नीचे की ओर रखते हुए कढ़ाई में सजा दें, जैसा कि फोटो में दिख रहा है। भीड़ न लगाएँ, ताकि हर टमाटर को सीधी गर्मी मिले।
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छिली हुई लहसुन की कलियाँ टमाटरों के बीच की खाली जगह में डाल दें। लहसुन सीधे तेल के संपर्क में आएगा और हल्का सुनहरा होकर खुशबू छोड़ेगा। इसे जलने न दें, वरना चटनी में कड़वाहट आ जाएगी।
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टमाटर के ऊपर ज़रूरत के हिसाब से नमक छिड़क दें। नमक टमाटर का पानी बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे वे जल्दी गलते हैं। नमक थोड़ा कम ही रखें, अंत में चखकर फिर से डाल सकते हैं।
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कढ़ाई को ढककर धीमी आँच पर 8-10 मिनट पकने दें। टमाटर नरम होकर पानी छोड़ने लगेंगे और छिलका सिकुड़ने लगेगा। बीच में एक-दो बार टमाटर पलट दें ताकि दोनों तरफ से बराबर पकें।
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जब टमाटर पूरी तरह पक जाएँ और छिलका अलग होने लगे, तब छिलके को चिमटी या कलछी की मदद से निकाल दें। यह चरण सरल है, क्योंकि पके टमाटर का छिलका बिना ज़ोर लगाए उतर जाता है।
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अब करछी के पिछले हिस्से से टमाटर और लहसुन को कढ़ाई में ही दबाते हुए मैश करें। दरदरा रखेंगे तो चटनी में बनावट रहेगी। चाहें तो थोड़ी देर और पकाकर पानी सुखा लें, ताकि चटनी गाढ़ी बने।
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आँच बंद करके या बहुत धीमी रखकर बारीक कटा प्याज़, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाएँ। कच्चा प्याज़ चटनी में हल्का कुरकुरापन और तीखापन लाता है। पकाने की ज़रूरत नहीं, गरम चटनी की गर्मी से ही यह थोड़ा नरम हो जाएगा।
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चटनी को चखकर स्वादानुसार नमक डालें, फिर एक चुटकी चीनी मिलाएँ। चीनी का काम चटनी को मीठा करना नहीं, बल्कि टमाटर की खटास को संतुलित करना है। अच्छी तरह मिला लें।
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आखिर में एक छोटा चम्मच कच्चा सरसों का तेल चटनी पर डालकर मिला दें। यह चटनी को तीखी, चटकदार महक देता है और पूरे स्वाद को उभार देता है। चटनी तैयार है।
कलौंजी वाला पराठा
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एक बड़े बर्तन में एक कटोरी गेहूँ का आटा निकाल लें। चाहें तो पहले छान लें, इससे पराठे और नरम बनते हैं। बीच में थोड़ा गड्ढा बना लें।
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उंगलियों से एक चुटकी नमक आटे में डालें और हल्के हाथ से मिला दें। पराठे के साथ चटनी में भी नमक है, इसलिए यहाँ कम ही रखें।
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आटे में आधा छोटा चम्मच कलौंजी बिखेर दें। इसकी हल्की तीखी, सौंधी महक पराठे को खास बना देती है। फोटो में दिख रहे काले दाने ही कलौंजी हैं।
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आधा छोटा चम्मच तेल आटे में डालकर उंगलियों से मसलते हुए मिला दें। तेल की वजह से आटा मुलायम रहता है और पराठे सेंकने के बाद भी नरम बने रहते हैं।
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आटे के बीच के गड्ढे में लगभग ¼ कप पानी डालें। पूरा पानी एक साथ न डालें, थोड़ा-थोड़ा करके मिलाएँ। इससे आटे की नमी पर आपका नियंत्रण रहता है।
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हाथ से आटे को किनारों से समेटते हुए इकट्ठा करें और सानना शुरू करें। शुरू में आटा खुरदरा और चिपचिपा लगेगा, घबराएँ नहीं। थोड़ी देर मसलने पर वह एक गोले का आकार ले लेगा।
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कुछ मिनट गूँथने के बाद आटा चिकना, मुलायम और एक गोले जैसा हो जाएगा। उंगली से दबाने पर हल्का धँसे और वापस उभरे, तो समझिए सही गुँथा है। ढककर 10-15 मिनट आराम दें।
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आटे से नींबू के आकार की लोई तोड़ें और हथेलियों के बीच घुमाकर चिकनी गोल बना लें। इसे सूखे आटे में लपेट लें ताकि बेलते समय न चिपके।
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लोई को चकले पर रखकर हल्के हाथ से बेलते हुए पतली गोल रोटी बनाएँ। बहुत पतली न बेलें, क्योंकि आगे इसे मोड़ना है। फोटो में दिख रहा है कि रोटी पर कलौंजी के दाने बिखरे हैं और उस पर तेल की बूँदें भी हैं।
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रोटी की सतह पर हल्का तेल या घी चुपड़ दें और उसे बीच से मोड़कर अर्धचंद्र का आकार दें। यह परत बनाने का पहला चरण है। अगला मोड़ (त्रिकोण) और तवे पर सेंकने के चरण आप अगली फोटो के साथ भेजेंगी, तब मैं उन्हें पूरा कर दूँगा।
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अर्धचंद्र पर फिर थोड़ा तेल लगाएँ और उसे एक बार और मोड़ दें। अब आटा त्रिकोण (तिकोने) आकार का हो जाएगा। हर मोड़ पर तेल लगाने से पराठे में परतें बनती हैं।
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त्रिकोण को दोनों तरफ से थोड़े सूखे आटे में हल्का लपेट लें, फिर चकले पर रखकर हल्के हाथ से बेलें। पराठा मध्यम मोटाई का रखें, न बहुत मोटा, न बहुत पतला। ज़्यादा ज़ोर न लगाएँ, वरना परतें दब जाएँगी और पराठा सख्त बनेगा।
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तवा मध्यम-तेज़ आँच पर गरम करें। बेला हुआ पराठा तवे पर डालें और कच्चा सूखा ही सिकने दें। कुछ देर में सतह पर हल्के सफ़ेद धब्बे और बुलबुले उभरने लगेंगे। यही पलटने का संकेत है।
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पराठे को चिमटे या हाथ से सावधानी से पलट दें। दूसरी तरफ सिंकने पर पराठा हल्का-सा फूलने लगेगा। यह इस बात की पहचान है कि अंदर की परतें खुल रही हैं।
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जब पराठा दोनों तरफ से थोड़ा सिक जाए, तो ऊपर की तरफ हल्का तेल या घी लगाएँ। फिर पलटकर दूसरी तरफ भी लगाएँ। मध्यम आँच पर दोनों तरफ सुनहरे भूरे धब्बे आने तक सेंकें। कलछी से हल्का दबाने पर कुरकुरी परतें और अच्छी खुलती हैं।
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गरमा-गरम पराठा प्लेट में निकालें और बगल में एक बड़ा चम्मच टमाटर की चटनी रखें। पराठे का टुकड़ा तोड़कर चटनी के साथ खाएँ और असली देसी स्वाद का आनंद लें।
